













डॉ. संजीव भनावत द्वारा साझा
पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया के राजस्थान चैप्टर (वर्तमान जयपुर चैप्टर) के प्रथम प्रकाशन को स्मरण करते हुए यह कहना उचित होगा कि यह केवल एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि उस समय की प्रतिबद्धता, दूरदृष्टि और जनसंपर्क के क्षेत्र में स्थापित मूल्यों का सजीव प्रतिबिंब है।
जब संसाधन सीमित थे, किन्तु उत्साह और समर्पण असीमित—तब ऐसे प्रयासों ने ही संस्थागत पहचान को आकार दिया। इस प्रकाशन के पन्नों को पलटते हुए न केवल अतीत की स्मृतियाँ जीवंत हो उठती हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट होता है कि छोटे-छोटे प्रयास समय के साथ एक सशक्त परंपरा का रूप ले लेते हैं।
आज, जब हम इसे जयपुर चैप्टर के रूप में निरंतर विकसित होते देखते हैं, तो यह यात्रा हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। यह दर्शाती है कि समर्पण, निरंतरता और दूरदृष्टि के साथ की गई हर शुरुआत एक दिन इतिहास बन जाती है।
इस महत्वपूर्ण यात्रा को संभव बनाने वाले सभी सहयोगियों, मार्गदर्शकों एवं साथियों को विनम्र श्रद्धांजलि एवं हार्दिक नमन।

